कर भी लेंगे गर फ़तेह ऊँचे पहाड़ को हम, क्यूँ प्यार फिर भी तेरा मुश्किल नज़र आया।
लेखक-रिशी गोयल
सभी महीनो में ये महीना कुछ ख़ास होता है, दिसंबर एक महीना नही एहसास होता है।
ये जो सुना है मैंने गर सच है तो, हिचकियाँ बोहोत परेशां करती होंगी उसको।