Monday, 11 December 2017

दर्द-ए-दिल

कर भी लेंगे गर फ़तेह ऊँचे पहाड़ को हम,
क्यूँ प्यार फिर भी तेरा मुश्किल नज़र आया।

लेखक-रिशी गोयल

Thursday, 7 December 2017

कुछ खास


सभी महीनो में ये महीना कुछ ख़ास होता है,
दिसंबर एक महीना नही एहसास होता है।

लेखक-रिशी गोयल

हिचकी

ये जो सुना है मैंने गर सच है तो, हिचकियाँ बोहोत परेशां करती होंगी उसको।