हाल-ए-दिल
Thursday, 6 September 2018
हिचकी
ये जो सुना है मैंने गर सच है तो,
हिचकियाँ बोहोत परेशां करती होंगी उसको।
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हिचकी
ये जो सुना है मैंने गर सच है तो, हिचकियाँ बोहोत परेशां करती होंगी उसको।
शेर
खूबसूरत है उसकी आँखें, या फिर नजरिया मेरा, खेर छोड़ो, तारीफ़ तो आखिर उसी की है।
ईद मुबारक
चाँद का दीदार हुआ तो मुक़म्मल हुई ईद, मायने है अलग-अलग सबके चाँद को लेकर।
दर्द-ए-दिल
कर भी लेंगे गर फ़तेह ऊँचे पहाड़ को हम, क्यूँ प्यार फिर भी तेरा मुश्किल नज़र आया। लेखक-रिशी गोयल
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