याद जब भी आती तेरी मेरे दिल के आँगन मे, पतझड़ आँखें गीली होती जैसे धरती सावन मे।
ये जो सुना है मैंने गर सच है तो, हिचकियाँ बोहोत परेशां करती होंगी उसको।
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