चाँद का दीदार हुआ तो मुक़म्मल हुई ईद,
मायने है अलग-अलग सबके चाँद को लेकर।
Friday, 30 June 2017
Monday, 26 June 2017
Monday, 19 June 2017
Sunday, 11 June 2017
इलाज़-ए-दिल
में अक़्सर ये देख कर जल जाता हूँ, कितना प्यार उसे मुझसे है,
मरहम का काम तो दिल करता है, ना मे गवाही देकर।
Sunday, 4 June 2017
शेर
तबियत तो दिल की नासाज़ थी अब मिट्टी(शरीर) का भी वही हाल है,
मिट्टी,मिट्टी मे मिलनी है, दिल का इलाज़ तो उसके लफ़्ज़ों से हैं।
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हिचकी
ये जो सुना है मैंने गर सच है तो, हिचकियाँ बोहोत परेशां करती होंगी उसको।
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कर भी लेंगे गर फ़तेह ऊँचे पहाड़ को हम, क्यूँ प्यार फिर भी तेरा मुश्किल नज़र आया। लेखक-रिशी गोयल