ईद की खुशियों में तो शरीख हम भी हुए ए राहिल, चाँद का दीदार अभी बाक़ी है तो क्या।
ये जो सुना है मैंने गर सच है तो, हिचकियाँ बोहोत परेशां करती होंगी उसको।
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