तेरी मोहब्बत में दुनिया को आग लगा दूँ क्या मैं,
उस चाँद को फिर से राख बना दूँ क्या मैं,
वो जो गुनाह कबूले थे मैंने उस दिन,तेरे थे,
ये बात सारी दुनिया को बता दूँ क्या मैं।
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हिचकी
ये जो सुना है मैंने गर सच है तो, हिचकियाँ बोहोत परेशां करती होंगी उसको।
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कर भी लेंगे गर फ़तेह ऊँचे पहाड़ को हम, क्यूँ प्यार फिर भी तेरा मुश्किल नज़र आया। लेखक-रिशी गोयल
बहुत सूंदर
ReplyDeleteबहुत सूंदर
ReplyDeleteThanks bhaiya
DeleteThanks bhaiya
DeleteBhut khub
ReplyDeleteThanks
DeleteThanks
DeleteBhut khub
ReplyDeleteAwesome sir
ReplyDeleteThanks
DeleteIt's my pleasure rishi Sahab
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