यूँ इस कदर पास न आया करो,
महफ़िलो में धड़कने न बढ़ाया करो,
और प्यार हूँ तुम्हारा कुछ तो ख्याल करो,
यूँ ऐरें-गैरों से दिल न लगाया करो।
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हिचकी
ये जो सुना है मैंने गर सच है तो, हिचकियाँ बोहोत परेशां करती होंगी उसको।
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कर भी लेंगे गर फ़तेह ऊँचे पहाड़ को हम, क्यूँ प्यार फिर भी तेरा मुश्किल नज़र आया। लेखक-रिशी गोयल
Wah wah wah wah bhut khub rishi sahab
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