तेरी आँखो से मैं काजल चुरा लेता तो अच्छा था,
तेरी बातों मे मैं मिसरी मिला देता तो अच्छा था,
तेरे होने से ज्यादा दूर जाने ने सताया है,
मेरे जो दिल में था तुझ को बता देता तो अच्छा था।
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हिचकी
ये जो सुना है मैंने गर सच है तो, हिचकियाँ बोहोत परेशां करती होंगी उसको।
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कर भी लेंगे गर फ़तेह ऊँचे पहाड़ को हम, क्यूँ प्यार फिर भी तेरा मुश्किल नज़र आया। लेखक-रिशी गोयल
😍❤️❤️❤️❤️
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