तबियत तो दिल की नासाज़ थी अब मिट्टी(शरीर) का भी वही हाल है,
मिट्टी,मिट्टी मे मिलनी है, दिल का इलाज़ तो उसके लफ़्ज़ों से हैं।
Subscribe to:
Post Comments (Atom)
हिचकी
ये जो सुना है मैंने गर सच है तो, हिचकियाँ बोहोत परेशां करती होंगी उसको।
-
कर भी लेंगे गर फ़तेह ऊँचे पहाड़ को हम, क्यूँ प्यार फिर भी तेरा मुश्किल नज़र आया। लेखक-रिशी गोयल
👌👌
ReplyDelete👌👌👌
ReplyDelete