Monday, 11 December 2017

दर्द-ए-दिल

कर भी लेंगे गर फ़तेह ऊँचे पहाड़ को हम,
क्यूँ प्यार फिर भी तेरा मुश्किल नज़र आया।

लेखक-रिशी गोयल

1 comment:

हिचकी

ये जो सुना है मैंने गर सच है तो, हिचकियाँ बोहोत परेशां करती होंगी उसको।