आओ जन्न्त को जमीं पर लाते है कहीं,
अपनी मोहब्बत को आसमानी बनाते है कहीं,
और चाँद तारों पर तो मकां सब ने बना लिया,
आओ धरती पर घर बनाते है कहीं।
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हिचकी
ये जो सुना है मैंने गर सच है तो, हिचकियाँ बोहोत परेशां करती होंगी उसको।
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कर भी लेंगे गर फ़तेह ऊँचे पहाड़ को हम, क्यूँ प्यार फिर भी तेरा मुश्किल नज़र आया। लेखक-रिशी गोयल
👏👏👏👏
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