Saturday, 20 May 2017

दिल को लगता हैं। क्या क्या ??

अब मेरी साँसो में समाई भी बोहोत लगती है,
ताज्जुब ये हैं के पराई भी बोहोत लगती है,
इसी काशमश में करता रहा प्यार मैं उसको,
वो मेरे ख्वाबो की परछाई भी बोहोत लगती है।

2 comments:

हिचकी

ये जो सुना है मैंने गर सच है तो, हिचकियाँ बोहोत परेशां करती होंगी उसको।