कौन कितना पानी में है, कौन कितना दलदल में, वक़्त के रहते सब के चेहरे निखर-निखर के आयेंगे।
ये जो सुना है मैंने गर सच है तो, हिचकियाँ बोहोत परेशां करती होंगी उसको।
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