Sunday, 27 May 2018

शेर

मेरी कोशिश थी इतनी बस सिमट जाऊ मैं तुझ में ही,
तेरी कोशिश थी इतनी बस के खंज़र घोंप दिया जाये।

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हिचकी

ये जो सुना है मैंने गर सच है तो, हिचकियाँ बोहोत परेशां करती होंगी उसको।